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ओव्यूलेशन कैलकुलेटर


ओव्यूलेशन कैलकुलेटर

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ओव्यूलेशन विंडो जून 13, 2023 - जून 17, 2023
सबसे संभावित ओव्यूलेशन तिथि जून 15, 2023
गर्भ धारण करने के लिए संभोग विंडो Jun 10, 2023 - Jun 17, 2023
गर्भावस्था परीक्षण जून 24, 2023
अगले पीरियड की शुरुआत जून 29, 2023

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अगले 6 चक्रों के लिए अनुमान
पीरियड शुरू ओव्यूलेशन विंडो नियत तारीख
1 जून 1, 2023 जून 13, 2023 - जून 17, 2023 मार्च 7, 2024
2 जून 29, 2023 जुलाई 11, 2023 - जुलाई 15, 2023 Apr 4, 2024
3 जुलाई 27, 2023 अग 8, 2023 - अग 12, 2023 मई 2, 2024
4 अग 24, 2023 सित 5, 2023 - सित 9, 2023 मई 30, 2024
5 सित 21, 2023 अक्ट 3, 2023 - अक्ट 7, 2023 जून 27, 2024
6 अक्ट 19, 2023 अक्ट 31, 2023 - नव 4, 2023 जुलाई 25, 2024

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विषय सूची

  1. ओव्यूलेशन प्रक्रिया
  2. ओव्यूलेशन के लक्षण
  3. ओव्यूलेशन के दौरान हार्मोनल परिवर्तन
  4. ओव्यूलेशन की उम्मीद कब करें
  5. ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए उपकरण
    1. तापमान परिवर्तन के माध्यम से ओव्यूलेशन का दिन निर्धारित करना
  6. गर्भवती होने के लिए ओव्यूलेशन आवश्यक है
  7. एक ही चक्र के दौरान कई ओव्यूलेशन
  8. महिला बांझपन और ओव्युलेट करने में असमर्थता
    1. PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम)
    2. प्राथमिक अंडाशय अपर्याप्तता (प्राइमरी ओवेरीयन इनसफ़िशियन्सी)
    3. हाइपोथैलेमिक डिसफंक्शन
    4. प्रोलैक्टिन एक्सेस
    5. अन्य सामान्य कारण

ओव्यूलेशन कैलकुलेटर

एक महिला होने के नाते, आपने शायद "ओव्यूलेशन" (Ovulation) शब्द कई बार सुना होगा। लेकिन क्या आप वास्तव में इसका मतलब जानती हैं? आपके मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) के दौरान ओव्यूलेशन वह प्रक्रिया है जब अंडाशय (Ovary) से एक परिपक्व अंडा निकलता है। अंडा निकलने के बाद, यह शुक्राणु (स्पर्म) द्वारा निषेचित (फर्टिलाइज़) हो भी सकता है और नहीं भी। अगर अंडा फर्टिलाइज़ हो जाता है, तो यह गर्भाशय (Uterus) में जाकर प्रत्यारोपित (इम्प्लांट) हो जाता है, जिससे गर्भावस्था (Pregnancy) की शुरुआत होती है। वहीं, अगर अंडा फर्टिलाइज़ नहीं होता है, तो यह नष्ट होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप गर्भाशय की परत झड़ने लगती है और आपके पीरियड्स या मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं।

गर्भधारण करने (Conceive) या अनचाहे गर्भ से बचने के लिए महिलाओं का इस प्रक्रिया को समझना बेहद ज़रूरी है। अपने मासिक धर्म चक्र को ट्रैक करने से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करने में भी मदद मिलती है। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक सटीक ओव्यूलेशन कैलकुलेटर बहुत मददगार साबित होता है।

यदि आप माँ बनने की कोशिश कर रही हैं, तो यह जानना आपकी बहुत मदद कर सकता है कि महीने के किन दिनों में आप सबसे अधिक प्रजननक्षम (फर्टाइल) होती हैं। आमतौर पर एक महिला का मासिक चक्र 28 दिनों का होता है, हालाँकि यह हर महिला में अलग-अलग हो सकता है। इन 28 दिनों के चक्र में, औसतन केवल छह दिन ऐसे होते हैं जब किसी महिला के गर्भवती होने की संभावना सबसे अधिक होती है। इन विशेष दिनों को "फर्टाइल विंडो" (Fertile Window) कहा जाता है।

एक निःशुल्क ओव्यूलेशन कैलकुलेटर आपको यह अनुमान लगाने में मदद करता है कि आपकी फर्टाइल विंडो कब शुरू होगी। हालांकि, ध्यान रखें कि कैलकुलेटर आपको एक संभावित समय-सीमा बताता है; यह इस बात की 100% गारंटी नहीं है कि आप गर्भवती हो ही जाएंगी।

सच तो यह है कि केवल छह दिनों की छोटी सी समय-सीमा होने के कारण, अक्सर महिलाएं इस फर्टाइल विंडो से चूक जाती हैं। इसलिए, गर्भधारण का सही अवसर खोने के बजाय, एक फर्टाइल विंडो कैलकुलेटर का उपयोग करें। यह आपको बताएगा कि गर्भवती होने के लिए आपको किन दिनों में प्रयास करना चाहिए।

ओव्यूलेशन प्रक्रिया

एक महिला का मासिक धर्म चक्र उसके पीरियड के पहले दिन से शुरू होता है, जिसे फॉलिक्युलर चरण (Follicular phase) की शुरुआत कहा जाता है। इस चरण के दौरान, पिट्यूटरी ग्रंथि फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) जारी करती है, जो ओवेरियन फॉलिकल्स के विकास को उत्तेजित करता है। इनमें से हर एक फॉलिकल में एक अंडा होता है। जैसे ही एक अंडा पूरी तरह से परिपक्व हो जाता है, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) का स्तर तेजी से बढ़ता है, जो ओव्यूलेशन को ट्रिगर करता है।

ओव्यूलेशन आमतौर पर अगले पीरियड शुरू होने से लगभग 10 से 16 दिन पहले होता है, लेकिन यह हर महिला और हर चक्र में अलग-अलग हो सकता है। ओव्यूलेशन के बाद ल्यूटियल चरण (Luteal phase) शुरू होता है, जिसके दौरान शरीर संभावित गर्भावस्था के लिए खुद को तैयार करता है। यदि फर्टिलाइजेशन नहीं होता है, तो कॉर्पस ल्यूटियम (अंडा निकलने के बाद बचा हुआ फॉलिकल) सिकुड़ जाता है। इससे प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट आती है, और गर्भाशय की परत पीरियड्स के रूप में बाहर निकल जाती है। हालाँकि, यदि महिला गर्भवती हो जाती है, तो गर्भाशय की परत को बनाए रखने के लिए इन हार्मोन्स का स्तर बढ़ा हुआ रहता है।

हर महिला का चक्र अनोखा होता है। एक औसत चक्र 25 से 35 दिनों का होता है। चक्र की अवधि भी भिन्न हो सकती है; कुछ महिलाओं को छोटे या लंबे चक्र का अनुभव होता है। यह पूरी प्रक्रिया हार्मोन और शारीरिक प्रतिक्रियाओं का एक जटिल संयोजन है जो हर महीने दोहराई जाती है।

ओव्यूलेशन के लक्षण

ध्यान देने योग्य ओव्यूलेशन के सात मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • योनि (Vagina) या वल्वा में हल्की सूजन,
  • बेसल शरीर के तापमान (BBT) का हल्का कम होना और फिर अचानक बढ़ जाना,
  • सेक्स ड्राइव (कामेच्छा) में वृद्धि,
  • गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) का नरम और खुला होना,
  • स्पॉटिंग या हल्का रक्तस्राव,
  • पेट के निचले हिस्से में हल्की ऐंठन या झुनझुनी महसूस होना,
  • सर्वाइकल म्यूकस (Cervical mucus) का पतला, पारदर्शी और कच्चे अंडे की सफेदी जैसा हो जाना।

ओव्यूलेशन के दौरान हार्मोनल परिवर्तन

अंडाशय (Ovary) का मुख्य कार्य अंडे और हार्मोन का उत्पादन करना है। जब एक बच्ची का जन्म होता है, तो उसके अंडाशय में लाखों अपरिपक्व अंडे होते हैं, लेकिन उसके बाद जीवन भर कोई नया अंडा नहीं बनता।

अंडे लगातार बदलते रहते हैं। उनमें से कई तो परिपक्व होने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। अंडों के नष्ट होने की यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है: जन्म से पहले, यौवन (Puberty) के दौरान और यहां तक कि गर्भनिरोधक गोलियां लेते समय भी। मूल रूप से, एक महिला का अंडाशय जीवन भर अंडों की संख्या में निरंतर कमी का अनुभव करता है।

एक महिला की प्रजनन क्षमता उसके शारीरिक रूप से बूढ़े होने से काफी पहले ही कम होने लगती है। यह जर्म सेल (Germ cell) की संख्या में कमी के कारण होता है। जब कोई मादा भ्रूण अपनी माँ के गर्भ में 20-22 सप्ताह का होता है, तब उसमें जर्म सेल्स की संख्या सबसे अधिक होती है। इनकी संख्या लगभग 7 मिलियन तक पहुंच सकती है, और ये सभी विकास के विभिन्न चरणों में होते हैं।

जन्म के समय, एक बच्ची के पास लगभग 2 मिलियन (20 लाख) अंडे होते हैं। और जब तक उसे पहली बार पीरियड्स आते हैं, तब तक केवल 250,000 से 450,000 फॉलिकल्स ही बचे होते हैं।

35 वर्ष की आयु तक आते-आते, एक महिला के अंडाशय में लगभग केवल 25,000 फॉलिकल्स ही शेष रह जाते हैं।

यौवन के दौरान, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) के बढ़ने के कारण अंडे परिपक्व होने लगते हैं, और हर एक अंडे के आसपास तरल पदार्थ (Fluid) बनने लगता है।

जैसा कि पहले बताया गया है, पीरियड के पहले दिन को आपके चक्र का पहला दिन माना जाता है। इस चरण के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होता है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि को अधिक LH और FSH स्रावित करने का संकेत देता है। ये हार्मोन अंडाशय में फॉलिकल्स के विकास को उत्तेजित करते हैं, जिनमें से हर एक के अंदर एक अंडा होता है।

हर महीने परिपक्व होने वाले फॉलिकल्स की संख्या हर महिला में अलग-अलग होती है। लेकिन इनमें से एक फॉलिकल दूसरों की तुलना में अधिक तेज़ी से विकसित होने लगता है, जिसे 'प्रमुख फॉलिकल' (Dominant Follicle) कहा जाता है।

चक्र के सातवें दिन तक, यह प्रमुख फॉलिकल बढ़ता रहता है और रक्त में एस्ट्रोजन का स्तर भी बढ़ने लगता है। एस्ट्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) के स्राव को कम कर देता है, जिससे छोटे फॉलिकल्स नष्ट हो जाते हैं।

जब एस्ट्रोजन का स्तर पर्याप्त रूप से उच्च हो जाता है, तो यह शरीर में LH के स्तर को अचानक बढ़ा देता है (LH Surge)। यह आमतौर पर आपके चक्र के 13वें दिन के आसपास होता है। LH में यह तेज़ी फॉलिकल के अंदर कई जटिल प्रक्रियाओं को शुरू करती है, जिससे अंडे की अंतिम परिपक्वता होती है। LH बढ़ने के लगभग 28 से 36 घंटे बाद ओव्यूलेशन होता है।

अंडाशय के फॉलिकल में बची हुई कोशिकाएं एक नए रूप में बदल जाती हैं, जिसे कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus Luteum) कहा जाता है। एस्ट्रोजन के साथ-साथ, शरीर प्रोजेस्टेरोन का भी उत्पादन शुरू कर देता है ताकि गर्भाशय को एक फर्टिलाइज़्ड अंडे के प्रत्यारोपण (Implantation) के लिए तैयार किया जा सके।

ओव्यूलेशन के बाद आपके मासिक चक्र का दूसरा भाग शुरू होता है, जिसे ल्यूटियल चरण (Luteal phase) कहा जाता है। यह चरण आमतौर पर 10 से 15 दिनों तक चलता है।

इस दौरान, गर्भावस्था की स्थिति में भ्रूण (Embryo) को सहारा देने के लिए शरीर में कई बदलाव होते हैं। ये परिवर्तन प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के बढ़ने के कारण होते हैं, जो कॉर्पस ल्यूटियम द्वारा बनाया जाता है। इस हार्मोन की उपस्थिति में, गर्भाशय की परत अंडे के लिए एक मोटी और रक्त-समृद्ध (Vascularized) परत बनाना शुरू कर देती है।

अगर गर्भधारण हो जाता है, तो कॉर्पस ल्यूटियम गर्भावस्था के पहले दस हफ्तों तक प्रोजेस्टेरोन जारी करता रहता है। लेकिन अगर भ्रूण प्रत्यारोपित (Implant) नहीं होता है, तो प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम होने लगेगा, जिससे कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाएगा और गर्भाशय की परत टूटकर पीरियड्स के रूप में बहने लगेगी।

ओव्यूलेशन की उम्मीद कब करें

ओव्यूलेशन आमतौर पर आपके अगले मासिक धर्म (पीरियड) के शुरू होने से ठीक 14 दिन पहले होता है। इसलिए, अगर आपका मासिक चक्र 28 दिनों का है, तो आपका ओव्यूलेशन आपके पीरियड शुरू होने के दिन से लगभग दो सप्ताह बाद हो सकता है।

ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए उपकरण

जैसा कि हमने पहले बताया, ओव्यूलेशन कैलकुलेटर ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए सबसे आसान और बेहतरीन उपकरण है। इसके अलावा, ओव्यूलेशन निर्धारित करने के कुछ और अधिक सटीक तरीके भी हैं:

  • फॉलिक्युलोमेट्री (Folliculometry): यह ओव्यूलेशन ट्रैक करने की सबसे सटीक क्लिनिकल विधि है।
  • ओव्यूलेशन प्रिडिक्टर किट (OPK): ये टेस्ट ओव्यूलेशन से लगभग 24 से 36 घंटे पहले यूरिन में LH हार्मोन की वृद्धि को मापते हैं। हालांकि, कभी-कभी इन परीक्षणों में 'फॉल्स-पॉजिटिव' (गलत सकारात्मक) परिणाम भी आ सकते हैं।
  • बेसल बॉडी टेम्परेचर (BBT) मापना: ओव्यूलेशन हुआ है या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए आप अपने बेसल तापमान के ग्राफ का उपयोग कर सकती हैं।
  • रक्त परीक्षण (Blood Test): ओव्यूलेशन की पुष्टि के लिए, आपके डॉक्टर प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के लिए रक्त परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। ओव्यूलेशन के लगभग 7 दिन बाद रक्त में इसकी मात्रा बढ़ जाती है।

तापमान परिवर्तन के माध्यम से ओव्यूलेशन का दिन निर्धारित करना

एक व्यक्ति के शरीर का तापमान पूरे दिन बदलता रहता है। शरीर के आराम की अवस्था के तापमान को बेसल तापमान (Basal Body Temperature) कहा जाता है। यह रात की गहरी नींद के दौरान अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाता है। इस तापमान के उतार-चढ़ाव को ट्रैक करके, आप महिला में ओव्यूलेशन के सटीक समय का पता लगा सकते हैं।

मासिक धर्म चक्र के पहले कुछ दिनों के दौरान, बेसल तापमान लगभग एक समान रहता है। ओव्यूलेशन से ठीक एक दिन पहले, यह थोड़ा कम हो जाता है। और ओव्यूलेशन वाले दिन, बेसल तापमान चक्र की शुरुआत के स्तर से थोड़ा ऊपर बढ़ जाता है। हालांकि, ये उतार-चढ़ाव बहुत मामूली होते हैं (लगभग 0.3-0.6 डिग्री)। लेकिन एक विशेष पैटर्न को देखकर इन संकेतों को आसानी से पहचाना जा सकता है।

इस विधि के सही तरीके से काम करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है:

  • तापमान मापने के लिए एक बहुत ही सटीक बेसल थर्मामीटर का उपयोग करें, जो तापमान के मामूली बदलाव (डिग्री के दसवें हिस्से) को भी ट्रैक कर सके।
  • आपको सुबह जागने के तुरंत बाद, बिस्तर से उठे बिना अपना तापमान मापना चाहिए। अगर आप थर्मामीटर लेने के लिए चलकर अपनी दराज तक भी जाती हैं, तो आपका बेसल तापमान बढ़ जाएगा।
  • सटीक परिणाम प्राप्त करने के लिए, हर दिन लगभग एक ही समय पर तापमान मापना महत्वपूर्ण है। तापमान मापने से पहले आपको कम से कम तीन घंटे की निर्बाध नींद लेनी चाहिए।
  • यह माप आमतौर पर मलाशय (Rectum) या मुंह के जरिए लिया जाता है। तापमान मापने का तरीका रोज़ाना एक ही होना चाहिए।
  • ओव्यूलेशन ट्रैक करने की यह विधि केवल उन अनुशासित महिलाओं के लिए सबसे उपयुक्त है जिनकी दिनचर्या नियमित होती है। फिर भी, कभी-कभी ग्राफ पर अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। बेसल तापमान केवल मासिक धर्म चक्र से ही नहीं, बल्कि बीमारी, नींद की कमी, तनाव या एक रात पहले सेक्स करने जैसे कारकों से भी प्रभावित हो सकता है। इससे ओव्यूलेशन का सटीक दिन निर्धारित करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

गर्भवती होने के लिए ओव्यूलेशन आवश्यक है

यदि आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं और आपके पीरियड्स नियमित हैं, तो सेक्स (शारीरिक संबंध) के लिए सबसे आदर्श समय ओव्यूलेशन से ठीक एक दिन पहले का होता है। हालाँकि, यदि आप ओव्यूलेशन के दिन और उससे 5 दिन पहले तक (फर्टाइल विंडो के दौरान) संबंध बनाती हैं, तो भी आपके गर्भवती होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

मूल रूप से, यह जानना बेहद ज़रूरी है कि ओव्यूलेशन कब होगा, ताकि आप अपनी फर्टाइल विंडो का अधिकतम लाभ उठा सकें। ओव्यूलेशन के आस-पास के दिनों में संबंध बनाने का मतलब है स्पर्म (शुक्राणु) की पर्याप्त मौजूदगी। चूंकि शुक्राणु का जीवनकाल सीमित (लगभग 3-5 दिन) होता है, इसलिए ओव्यूलेशन से पहले संबंध बनाना बेहतर होता है ताकि अंडा निकलते ही फर्टिलाइजेशन हो सके।

इसके अलावा, अगर आप अभी गर्भवती नहीं होना चाहती हैं, तो ओव्यूलेशन विंडो की जानकारी आपको यह तय करने में मदद करेगी कि आपको किन दिनों में असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए। कुल मिलाकर, एक मुफ्त ओव्यूलेशन कैलकुलेटर का उपयोग करके अपनी साइकिल को ट्रैक करना हर महिला के लिए एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प है।

एक ही चक्र के दौरान कई ओव्यूलेशन

कुछ महिलाओं में यह गलत धारणा होती है कि वे एक ही मासिक चक्र में दो बार ओव्यूलेट कर सकती हैं। वास्तव में ऐसा नहीं होता है। एक चक्र के दौरान ओव्यूलेशन केवल एक ही बार होता है। असल में जिस बात से भ्रम पैदा होता है, वह यह है कि एक ही ओव्यूलेशन प्रक्रिया के दौरान एक से अधिक अंडे रिलीज़ हो सकते हैं।

यदि आपके अंडाशय से एक बार में एक से अधिक अंडे निकलते हैं और वे फर्टिलाइज़ हो जाते हैं, तो इससे फ्रेटरनल ट्विन्स (जुड़वां बच्चे) होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन यह स्पष्ट है कि कोई भी महिला एक ही मासिक चक्र में दो अलग-अलग समय पर ओव्यूलेट (अंडे रिलीज़) नहीं कर सकती।

महिला बांझपन और ओव्युलेट करने में असमर्थता

दुर्भाग्य से, हर महिला नियमित रूप से ओव्यूलेट नहीं करती है, और ओव्यूलेशन की इस कमी को एनोव्यूलेशन (Anovulation) कहा जाता है, जो बांझपन (Infertility) का एक बड़ा कारण है। पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा हार्मोन उत्पादन में समस्या या अंडाशय से जुड़े अन्य अंतर्निहित मुद्दों के कारण ओव्यूलेशन विकार हो सकते हैं, जैसे:

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम)

पीसीओएस (PCOS) एक हार्मोनल असंतुलन है जो ओव्यूलेशन प्रक्रिया में गंभीर रूप से बाधा डालता है। यह स्थिति अक्सर मोटापे, इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin resistance), मुंहासे और शरीर या चेहरे पर अनचाहे बालों के विकास से जुड़ी होती है। महिलाओं में ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याओं का यह सबसे आम कारण है।

प्राथमिक अंडाशय अपर्याप्तता (प्राइमरी ओवेरीयन इनसफ़िशियन्सी)

इस स्थिति को प्रीमेच्योर ओवेरियन फेलियर (Premature Ovarian Failure) भी कहा जाता है। यह आमतौर पर समय से पहले अंडों के खत्म होने या किसी ऑटोइम्यून बीमारी के कारण होता है। आनुवंशिकी (Genetics) या कीमोथेरेपी जैसे उपचार भी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।

हाइपोथैलेमिक डिसफंक्शन

हमने पहले LH और FSH हार्मोन के महत्व और मासिक चक्र में उनकी भूमिका पर चर्चा की है। हाइपोथैलेमिक डिसफंक्शन तब होता है जब इन आवश्यक हार्मोन्स का उत्पादन बाधित हो जाता है। इसका सबसे आम लक्षण अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का बिल्कुल न आना है। अत्यधिक वजन कम होना या बढ़ना, भारी शारीरिक या मानसिक तनाव इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।

प्रोलैक्टिन एक्सेस

यह स्थिति कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण हो सकती है, जहां पिट्यूटरी ग्रंथि बहुत अधिक मात्रा में 'प्रोलैक्टिन' (Prolactin) हार्मोन बनाने लगती है। इस हार्मोन की अधिकता एस्ट्रोजन के उत्पादन को कम कर देती है, जिससे बांझपन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

अन्य सामान्य कारण

यद्यपि ऊपर बताई गई स्थितियां ओव्यूलेशन और बांझपन की समस्याओं के सबसे आम कारण हैं, लेकिन कुछ अन्य कारक भी गर्भधारण में बाधा बन सकते हैं। अन्य जोखिम कारकों में डैमेज फैलोपियन ट्यूब, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज (PID), एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis), और गर्भाशय या ग्रीवा से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हैं।